Mohhabat Shayari
अकेले इंसान को
मोहब्बत का सहारा जैसे
डूबते को मिले
किनारा,
'
बरसती मोहब्बत जैसै घटा घन-घोर,आवाज
मोहब्बत की
पानी का शोर,
'आसमान की ऊंचाई
मोहब्बत मे समाई,समंदर की
गहराई
मोहब्बत ने पाई,
'
दिल ही ज़ेवर
दिल ही चोर रिश्ता
मोहब्बत का इंसान से जैसे पतंग और डोर,
'महकती
मोहब्बत जहान मे ऐसे
महक फूलो की फैली हो जैसे।।
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