MERI MOHABBAT INDEFINITE
खुशबू बनकर
जिस्म मे छाई है
मोहब्बत बनकर
दिल मे आई है,
मैं जिस्म़ वो
परछाई है
धड़कन उसकी मेरे
दिल मे समाई है,
आशिकी हमारी दुनिया की सताई है
जिंदगी रह गई पिछे मौत सामने आई है,
जिस्म़ मिल ना सके तो
रूहे मिलने आई है।
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