Sad Shayari
चली गई छोड के कमी उसकी खलती है
बिना उसके ना
शाम ढलती है,
परछाई उसकी साथ-साथ चलती है
ना
यादे उसकी
मन से निकलती है,
आखें देख़ने को उसे
मचलती है
दिल की
तड़पन बार-बार उबलती है,
इश्क कि चिता बिना आग के भी जलती है।
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